हूं अध्यापक भौतिकी का,
साहित्य मेरे जो अंदर है;
श्रृंगार करे जो तू गोरी,
हर शब्द मेरे तेरा दर्पण है।।
हूं अध्यापक भौतिकी का,
साहित्य मेरे जो अंदर है;
श्रृंगार करे जो तू गोरी,
हर शब्द मेरे तेरा दर्पण है।।
Thanks for joining me!
Good company in a journey makes the way seem shorter. — Izaak Walton
